ज़िद से निभाते हैं – Ex Factor
Zid Se Nibhatey Hain Episode 4: मेरा कुछ सामान
इनायत अपनी vanity में थी और show host की बातें याद कर रही थी। इतना छुपाने के बावजूद लोग अब सवाल करने लगे हैं। यह सवाल वक़्त के साथ और भी बरता जाएगा। कब तक रोकेगी वह सबको ?
राधिका अंदर आई , “Are you alright, Haalu? ”
इनायत फॉरेन खुदको संभल कर मुस्कुराके कहती हैं, “Yes, I am!”
राधिका ने मोबाइल बढ़ाया, “शानू है…”
इनायत का दिल तेज़ धड़कने लगा , “Hello…”
“Hi, good afternoon, Inu. क्या तुम अपना share बेच रही हो?”, शांतनु की आवाज़ औपचारिक थी।
ऐसे सीधे काम की बात ! इनायत अपनी तेज़ होती धड़कनों को थोड़ी रोककर कहती है, “नहीं तो…”
शांतनु mechanical tone में कहता हैं, “Market में rumor फैला है। Let’s normalize the situation. कल annual event है। सबसे important event. पिछले साल तुमने skip किया था—gossip शुरू हो गया था। इस बार सबके सामने भाई से normally interact करो। कुछ photos, a few videos, media bites…हमारी publicity team संभाल लेगी।”
इनायत की आवाज़ मुश्किल से निकली—“हाँ…”
शांतनु नरम पड़ा—“I understand awkward है। Breakup news भी public करेंगे…but not tomorrow. पहले कल का event ठीक से हो जाए।”
“हाँ…”, फ़ोन कट गया। इनायत पत्थर की तरह बैठी रही। पानी पिया। साँसें संभालीं। मन में आया—“अच्छा हुआ शानू था… अगर नील होता तो कसम से जान निकल जाती…”, उसकी नज़र सामने रखी नीलाद्रि की तस्वीर पर गई । “ इससे पहले कि breakup rumor बाहर आए… मुझे सब ठीक करना होगा। मैं नील के बिना नहीं रह सकती।”
राधिका की आवाज़ आई, “हालू… बाहर आ … इमरान आया है ….”
इमरान का नाम सुनते ही उसके भीतर आग भड़क उठी। वह धीरे से उठी ।
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पिछले पंद्रह मिनट से इनायत इमरान से बात करने की कोशिश कर रही थी। भाई-बहन के बीच एक ऊँची , मज़बूत दीवार हमेशा से खड़ी थी । उस दीवार को पार कर इनायत की आवाज़ कभी इमरान या माँ तक पहुँच ही नहीं पाती । इमरान को लगता था कि इनायत की बेहिसाब दौलत वह दोनों हाथों से उड़ा सकता है—क्योंकि वह उससे 352 दिन छोटा है । माँ का भी मानना था कि छोटा भाई होने के नाते दौलत उसी की है। और इस सोच को हवा देते थे—खाला , खालू , फ़ारूक , सोफ़िया और फ़रज़ाना। इनायत जितना बन पड़ता , रिश्तेदारों का साथ देती रही । पर लुट जाना उसे मंज़ूर नहीं। आज फिर वही हिसाब-किताब सामने था। फाइल खुली थी—कुछ आंकड़े थे, ज़्यादातर गायब।
राधिका मायूस आवाज़ में बोली, “Total तीन किस्तों में तूने नब्बे करोड़ अस्सी लाख दिए हैं। और मैं कल दिन भर में सिर्फ चालीस करोड़ बत्तीस लाख तीन रुपये का हिसाब जुटा पाई। बाकी का कोई रिकॉर्ड नहीं। ना यह दे रहा है , ना फ़ारूक। In fact फ़ारूक ने तो मेरा phone उठाना भी बंद कर दिया है। अब जो तू ठीक समझे। पैसा भी तेरा… family भी तेरी।”
राधिका ने तीखी मुस्कान के साथ और जोड़ा, “सोच रही है ना… घर में भाभी को कैसे face करेगी? जब वो अपने भाइयों की कामयाबी सुनाएगी, तुझे भी तो बताना पड़ेगा—तेरे भाई ने क्या कमाया…या क्या उड़ाया। पहले यह mess नील भैया संभाल लेते थे, but now you have to figure it out by yourself.”
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इमरान सुन नहीं सकता। वह होंठों की हरकत से अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहा था।
इनायत अपने भाई को देखती है। इमरान बहुत handsome हैं। वह बाहर से जितना सुंदर है, काश उसका दिल भी उतना ही सुंदर होता। इनायत ने इशारे से पूछा—“पूरा हिसाब कहाँ है ? हमें पूरा हिसाब चाहिए। ”
इमरान ने हाथ हिलाए, कुछ अस्पष्ट ध्वनियाँ निकालीं—“आए…आए…उउउ…आए…आइए…आओ…”
मतलब—बस यही है सारा हिसाब।
इनायत ने दोबारा पूछा, “नहीं इमरान। यह पूरा नहीं है। पूरा हिसाब कहाँ है?”
वही जवाब। वही ध्वनियाँ।
इस बार इनायत ने तेज़ इशारे से पूछा, “फ़ारूक भाई कहाँ हैं? Phone क्यों नहीं उठाते? ”
इमरान ने उलझे इशारे किए—जैसे हमेशा करता है जब फँस जाता है। सामने वाले को और उलझा दो।
इनायत ने उसे पूरा मौका दिया । पर एक सीमा के बाद वह भी थक गई। उसने फाइल coffee table पर दे मारी, “इतना सारा पैसा कहाँ गया, इमरान ?”
उसकी दहाड़ से राधिका भी चौंक गई। दोनों जानती थीं—इमरान पर चिल्लाने का कोई फायदा नहीं। उस पर फ़ारूक का असर चलता है। राधिका ने धीरे कहा, “दिमाग ठंडा कर । इस पर चीखने से कुछ नहीं होगा । मैं फ़ारूक से contact करने की कोशिश करती हूँ।”
इमरान माहौल गरम देखकर खिसकने ही वाला था कि दरवाज़ा धड़ाम से खुला।
सोफ़िया अंदर आई। बिना किसी की परवाह किए couch पर बैठ गई, “आपा, this is really getting on my nerves! I had enough. I don’t understand why everyone is treating me like a doormat.”
इनायत ने शांत स्वर में पूछा, “What’s wrong, Sofi?”
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“मुझे अपना vanity चाहिए, और जब तक मेरा अपना vanity तैयार न हो, आपा में तुम्हारी vanity से काम चला सकती हूँ। I’ll manage but only for you,” सोफ़िया एक सांस में सब कुछ बोल देती है। फिरसे add करती हैं, ” इतनी सी बात हैं, अगर तुम से नहीं हो पाता तोह बता दो , में खाला से बात कर लेती हूँ।”
खाला—यानी इनायत की माँ।
इनायत ने राधिका की ओर देखा । उसका phone vibrate कर रहा था, “हाँ , बोलो नंदी भैया… ठीक है, मैं अभी आती हूँ…” राधिका जल्दी से बाहर चली गई।
अब पूरा ध्यान सोफ़िया पर था। इनायत ने कहा , “ अजीब बात है, सोफ़िया, तुझे अपनी debut में performance के सिवा बाकी सब दिख रहा है। शहज़ादी सोफ़िया को सोलह करोड़ की vanity चाहिए? कब तक चाहिए?”
सोफ़िया तमतमा उठी, “मेरी मज़ाक उड़ाना बंद करो आपा! Just because I’m tolerating all your nonsense, that doesn’t mean I have to. Enough is enough! सिर्फ एक साल… एक साल में अगर इस industry में तुम्हें replace ना कर दिया तो सोफ़िया नाम की कुतिया पाल लेना, खान मैडम !”
इनायत की आवाज़ बर्फ जैसी ठंडी हो गई, “तुझे पता है ना मुझे कुत्तों से डर लगता है। वैसे गिरगिट पाल लूँ तो चलेगा? छोटे-छोटे रंग बदलने वाले गिरगिट…”
तभी दरवाज़ा खुला। राधिका लौटी—साथ में दो नौजवान । मुश्किल से बीस-इक्कीस साल का होगा। दोनों बुरी तरह ज़ख्मी । चलते हुए भी लड़खड़ा रहे थे।
“हालु”, राधिका ने कहा, “यह भेंकी है… और यह टीटो। कल रात जो accident हुआ था… वही दोनों थे bike पर। इनके पास तेरी एक चीज़ है। तुझे वापस करना चाहते हैं।”
इनायत ने उन्हें बैठने का इशारा किया। तभी ध्यान गया—couch पर तो सोफ़िया बैठी है, “उठ…” इनायत का स्वर इतना कड़ा था कि सोफ़िया और इमरान दोनों चौंक कर खड़े हो गए।
Couch पर बैठे दो नौजवान काफी दर्द में थे। इनायत दोनों को बरी गौर से देखती हैं। दोनों के शरीर के दाएं तरफ ज़्यादा चोट हैं। इसका मतलब bike डाई तरफ skid हुआ था। भगबान का शुक्र हैं इनायत का हर एक staff अपने काम में बेहद माहिर हैं। नहीं तो पता नहीं क्या अनर्थ हो जाता।
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“कैसी तबीयत है अब ?”, इनायत की आवाज़ में साफ़ चिंता थी।
दोनों ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया।
“इतनी तकलीफ में आने की ज़रूरत नहीं थी…” इनायत ने मोबाइल उठाते हुए कहा , “हम hospital आने वाले थे तुमसे मिलने।”
राधिका ने जोड़ा, “She is right. Visiting hours पाँच बजे से हैं…”
“पाँच बजने में देर है, मैडम” , टीटो ने सूजे होंठों से कहा , “ हमसे इतना सब्र नहीं होता …”
भेंकी ने दर्द छुपाते हुए कहा, “पहले आपका सामान लौटा दें… इलाज तो चलता रहेगा।”
उनकी हालत देख इनायत के मन में सवाल उठा—ऐसी कौन-सी चीज़ है जिसके लिए ये जान जोखिम में डालकर आए हैं? इनायत बारह साल से industry में है। लाखों fans देखे हैं । fans की आँखें अलग होती हैं—पर नज़रें सबकी एक जैसी होती हैं। ये दोनों कोई fans नहीं हैं। तो ये कौन हैं ?
इनायत ने शारदा को message किया—“आप कोई हुक्म करें और हम ना मानें, ऐसा हो सकता है क्या? वो दो लड़के आ गए हैं। अभी सामने बैठे हैं।”
उधर भेंकी बेचैनी से bag टटोल रहा था। राधिका ने हल्का इशारा किया—“पागल तो नहीं?”
“माफ़ करना, Madam,” टीटो हिचकिचाया, “आपका time खराब कर रहा हूँ…”
“कोई बात नहीं। Please, take your time.” अब तक इनायत को भी जिज्ञासा हो चुकी थी।
आखिर टीटो ने एक छोटी कागज़ की पुड़िया निकाली । कांपते हाथों से आगे बढ़ाई, “यह… आपका सामान। ”
इनायत ने पुड़िया ली। टीटो की आँखों में अजीब-सा सुकून था—जैसे बोझ उतर गया हो।
उसने धीरे से कागज़ खोली। एक पतली, चपटी सोने की अंगूठी। वह अनायास मुस्कुराई, “क्या है यह?”
“आपकी अंगूठी, मैडम,” टीटो बोला। “उस रात गिर गई थी। मेरी बहन को मिली। उसने कहा—चाहे कुछ भी हो , यह अंगूठी सिर्फ इनायत खान को मिले। किसी और को नहीं। इसलिए…”
पहली बार टीटोने सीधे इनायतकी आँखों में देखा । राधिका ने अंगूठी लेकर पूछा, “किस रात की बात कर रहे हो?”
टीटो ने जवाब दिया—“27 July 2018 की रात ।”
तारीख सुनते ही इनायत और राधिका एक साथ सिहर उठीं। वही रात । वह रात जो अब तक खत्म नहीं हुई।
सुनते रहिए Bodhon 2047 Channel की Original Audio Story “ज़िद से निभाते हैं”।
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