ज़िद से निभाते हैं – Ex Factor
Zid Se Nibhatey Hain Episode 1: उस रात का सच क्या था?
“ उस रात क्या हुआ था , इनायत ? ”
इनायत की नज़रें सामने बिछे ग्रे कारपेट पर जमी थीं । जैसे उस फ़र्श पर कोई जवाब लिखा हो—जो वह पढ़ना नहीं चाहती थी। डॉक्टर सेठी ने फिर पूछा ,“क्या तुम कभी खुद जानने की कोशिश करोगी…कि उस रात सच में क्या हुआ था ?”
इनायत चौंकी। धीरे से सिर उठाकर कहा , “जी… सुन रही हूँ ।” फिर लगभग टूटती आवाज़ में बोली , “क्या आप स्लीपिंग पिल्स की डोज थोड़ी बढ़ा सकती हैं ? आजकल बिल्कुल सो नहीं पाती।”
डॉक्टर सेठी ने गहरी साँस ली , “रियली , इनायत ? ऍम आई ए ड्रग पेडलर टू यू ?” उनकी आवाज़ सख़्त थी , पर बेरुखी नहीं थी। “तुम हर हफ्ते आती हो। बोलती कुछ नहीं , और बस स्लीपिंग पिल्स ढूँढती रहती हो। बेटर यू सर्च द ट्रुथ…”
इनायत ने काँपते होंठों से कहा , “क्या फ़ायदा , डॉक्टर ?” उसने बात काट दी , “क्या फ़ायदा सच जानने का…जब सिक्के की दोनों तरफ़ सिर्फ हार लिखी हो ?”
डॉक्टर सेठी ने उसकी आँखों में देखा। फिर शांत स्वर में बोलीं , “सच हमें मुक्ति देता है , इनायत…सच से भागना बंद करो , प्लीज।” थोड़ा रुककर बोलीं ,“प्रॉमिस मी…चाहे कुछ भी हो , तुम हार नहीं मानोगी ।”
इनायत कुछ नहीं बोली। बस देखती रही। डॉक्टर सेठी ने बात बदली , “आज शारदा आ रही हैं ?”
इनायत हल्का-सा मुस्कुराई , “नहीं… कल। आधी रात की फ्लाइट…”
डॉक्टर सेठी ने साफ़ कहा , “मैं शारदा से बात करूँगी…”
इनायत समझ गई—सेशन ख़त्म। वह उठी , “जैसा आप ठीक समझें , डॉक्टर । थैंक्स फ़ॉर योर टाइम ।”
डॉक्टर सेठी ने नरमी से कहा , “अपना ख्याल रखना। कोई भी प्रॉब्लम हो—कॉल मी। दैट नंबर इज़ ऑलवेज ऑन।”
Asrusur Series — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 1
पच्चीसवीं मंजिल से नीचे उतरती लिफ्ट में इनायत खामोश खड़ी थी। बिलकुल अकेली। लिफ्ट की ग्रे दीवारें , शीशे की छत—सब जैसे उसकी ही तरह सच से छुप रहे थे। एक और सेशन खत्म हो गया। एक और बार…वह सच का सामना नहीं कर पाई। नीलाद्रि महेश्वरी । दस साल का रिश्ता । दस सेकंड में खत्म। लिफ्ट के शीशे में अपनी ही परछाई देखते हुए इनायत खुद से सवाल करती रही , “सच जानूँ? किससे? नील से? अगर वो सच कहे—तो कोई अपना खो जाएगा। अगर झूठ कहे—तब भी। मुझे सच नहीं , बस नील वापस चाहिए।”
Bait Series — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 1
राधिका कार के अंदर इनायत का इंतज़ार कर रही थी । दोस्ती नहीं—आदत , भरोसा और ज़रूरत। अच्छे-बुरे हर वक़्त में, बचपन से दोनों साथ थी। अब वही राधिका , शांतनु महेश्वरी की पत्नी थी। और इसी वजह से—नीलाद्रि का नाम हर बात में शामिल था। इनायत ने आँखें बंद कर लीं । सीट से टिक गई। तीन गाड़ियों का काफ़िला आगे बढ़ चला। राधिका ने हमेशा की तरह पूछा , “डॉक्टर ने क्या कहा?”
इनायत ने बिना आँखें खोले जवाब दिया, “यही… कि मेरे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है…”
राधिका खिड़की से बाहर देखने लगी। गुस्सा दबा हुआ था, “रिश्ते मज़ाक नहीं होते, हालू। काश तू ये पहले समझ पाती।”
नील का नाम नहीं लिया गया। ज़रूरत भी नहीं थी। फिर सीधा पूछ लिया, “वैसे हम नील भैया से कब मिल रहे हैं?” राधिका ने सीधा सवाल किया।
इनायत ने कोई जवाब नहीं दिया।
राधिका ने बात बदल दी। एक फ़ाइल उठाकर इनायत की गोद में रख दी, ” ये देखी थी ? “
इनायत ने सिर हिलाया, “टाइम नहीं मिला। क्या है?”
राधिका अपने गुस्से को दबाकर बोली, “इमरान और फारुख फिर फंड्स माँग रहे हैं । ऑलरेडी टू हंड्रेड थर्टी परसेंट ओवर बजट । हिसाब माँगो तो बदतमीज़ी…”
इनायत का सिर भारी था। राधिका बोलती रही, ” तेरे दो और प्रोजेक्ट्स लाइन-अप हैं, अगर बाहर वालों को पता चला कि तेरे अपने ही तेरा पैसा डुबो रहे हैं—तो इनायत खान की रेप्युटेशन पर असर पड़ेगा…”
राधिका कुछ पल रुककर पूछती है, “तू सुन रही है ना ?”
इनायत ने गहरी साँस ली। आँखें खोलीं, मगर नज़र नहीं मिलाई, “हाँ। सुन रही हूँ।” थोड़ा रुकी, “सच में… मुझे रिश्ते संभालना नहीं आता। तू ही बता , क्या करूँ ?”, फिर थकी हुई आवाज़ में बोली, “देखेंगे। बात करूँगी उनसे।”
राधिका समझ गई। आज और दबाने का कोई फ़ायदा नहीं था। कार खामोशी में आगे बढ़ती रही।
Chaatuspaad Series — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 1
गाड़ी तेज़ी से चल रही थी। इनायत की नज़र अचानक पीछे से आती एक बाइक पर टिक गई। वह तुरंत राधिका की तरफ़ झुकी, “राधे…सुबह से यह बाइक फॉलो कर रहा है…”
राधिका ने हल्के अंदाज़ में कहा,” पैप होगा…”
इनायत मगर राधिका की बात को नहीं मान पाई, “मुझे नहीं लगता। दोनों बहुत लापरवाह राइडर्स हैं।”
एक पल रुककर बोली, “नंदी भैया को बोल, बात कर लें। मैं नहीं चाहती कि मीडिया को कोई मसाला मिले…”
राधिका ने उसकी बेचैनी पकड़ ली। इनायत को आश्वस्त करके कही, “ठीक है। मैं देख लूँगी , खान मैडम। डोन्ट वोर्री।”
इनायत हल्के से मुस्कुराई। ‘खान मैडम’—एक नाम, जो प्यार से भी लिया जाता था… और डर से भी।
इनायत अपनी वैनिटी वैन में आई। आज आउटडोर शूट था—और एक रिस्की शॉट। डायरेक्टर तरुण साफ़ तौर पर असहज था। यह उसकी इनायत खान के साथ पहली फ़िल्म थी।
ड्रॉइंग एरिया में बैठते ही इनायत ने पूछा,”क्या हुआ, तरुण? राधे बोल रही थी, यू वॉन्टेड टू टॉक?”
तरुण हिचकिचाया, “मैडम… प्लीज ग़लत मत समझिए। आपकी काबिलियत पर कोई शक नहीं। बस…मैं आपकी जान को रिस्क में नहीं डालना चाहता।”
इनायत ने उसकी घबराहट देखी। उसे यह ईमानदार डर अच्छा लगा। वह शांत स्वर में बोली, “डोंट वरी , तरुण। मुझे कुछ नहीं होगा। और रेनो… वो मेरा बच्चा है। मुझे गिरने नहीं देगा।”
तरुण चौंका, “आजकल लोग इंसानों पर भरोसा नहीं करते…और आपको एक घोड़े पर इतना भरोसा है !”
इनायत मुस्कुराई, “क्योंकि ये रिश्ता है , तरुण। रिश्तेदारी नहीं।”
वह मेकअप रूम की ओर बढ़ गई। टीम तैयार खड़ी थी।
तरुण पीछे हटते हुए बोला, “मैं शॉट रेडी करता हूँ, मैडम…”
मेकअप के दौरान इनायत की नज़र सामने रखी तस्वीरों पर टिक गई—नीलाद्रि के साथ पुरानी यादें। इनायत हर वक़्त अपने आसपास नीलाद्रि को महसूस करना चाहती थी। वही एहसास उसे सुकून देता था। इनायत चुप बैठी रही—एक मैनिक्विन की तरह।
Bodhon-Petrol — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 1
सुबह के दस बज रहे थे। शूट के लिए तैयार इनायत जैसे ही अपनी वैनिटी से बाहर निकली, उसकी नज़र सामने जमा भीड़ पर पड़ी। कुछ टीनएज लड़के बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहे थे। बॉडीगार्ड्स उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन धक्का-मुक्की बढ़ रही थी। इनायत रुक गई । नंदी को इशारे से पास बुलाया, “क्या हुआ, नंदी भैया?”
नंदी तेज़ी से पास आया, “भाभी, सेल्फी लेना चाहते हैं। लोकल एमपी के लोग हैं।”
नंदी को सच से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह आज भी इनायत को ‘भाभी’ बुलाता था।
इनायत को ये लड़के ठीक नहीं लगे। फिर भी उसने हालात संभालने का फ़ैसला किया । वह शांत स्वर में बोली, “ठीक है। एक-एक करके आने दो।”
भीड़ तेजी से पास आया। इनायत की सिक्योरिटी बरी मुश्किल से सबको संभालने की कोशिश कर रही थी। इनायत एक-एक लड़के के साथ सेल्फी लेने लगी। तभी एक लड़का ज़रूरत से ज़्यादा पास आने लगा। अगले ही पल उसकी उंगलियाँ इनायत की कमर पर थीं। सब कुछ सेकंड्स में हुआ। इनायत झटके से पीछे हटी—और उसी पल उस लड़के के गाल पर एक ज़ोरदार तमाचा पड़ा।
पलक झपकते ही लगभग छह फुट का नंदी बिजली की तरह उनके बीच आ खड़ा हुआ। बाकी बॉडीगार्ड्स ने तुरंत घेरा बना लिया।
हालात बिगड़ने से पहले नंदी ने सख़्ती से कहा ,”आप लोग जाइए, भाभी। हम देख लेंगे।”
इनायत की आँखों में आग थी—घायल शेरनी जैसी।
राधिका समझ गई। उसने तुरंत उसका हाथ पकड़ी, ” हालू , चल । “
इनायत ने गहरी साँस ली। खुद को संभाला—और बिना पीछे देखे शूटिंग फ्लोर की तरफ़ बढ़ गई। काश यही तमाचा इनायत उस रात मार पाती…तो आज उसका घर बच जाता।
आख़िर क्या हुआ था उस रात ? वह कौन-सा सच है जिससे इनायत जाने-अनजाने भागती फिर रही है ? क्या होगा जब वह सच सबके सामने आएगा ?
जानने के लिए सुनते रहिए Bodhon 2047 Channel की Original Fiction Series “ज़िद से निभाते हैं” ।
कहानी के अगले पड़ाव के लिए अभी विज़िट करें — www.remoteowls.in
