ज़िद से निभाते हैं – Ex Factor
Zid Se Nibhatey Hain Episode 5: सच का सामना
Vanity के अंदर सन्नाटा छाया हुआ था । इनायत को लगा जैसे कि कोई उसकी छाती पर पैर रख दिया हो।
टीटो फर्श की तरफ देखते हुए बोला , “ 27 July 2018 की party में जिस लड़की को आप लोग ढूँढ रहे थे… वह मेरी बहन थी । तब सिर्फ बारह साल की थी । आपकी बहुत बड़ी fan थी । दिन-रात आपके जैसा बनने का सपना देखती थी ।..”
टीटो थके हुए आवाज़ में कहता हैं , “ घर से भागकर इस शहर में आई थी—बस आपको एक बार करीब से देखने के लिए ….किसी ने उसे आपसे मिलवाने का promise किया और उसे आपके farmhouse तक ले गया। उस रात जब आप लोग उसे ढूँढ रहे थे… वह वहीं थी। आप लोगों से छुप रही थी। ज़ख्मी थी …बुरी तरह से …”
कुछ देर रुक कर टीटो ने कहा , ” जब आप सब चले गए , तब वह भागने लगी । उसी भागदौड़ में यह अंगूठी उसके पैर के नीचे आ गई…और चपटी हो गई …”
इनायत पत्थर की तरह बैठी रही। जैसे किसी ने पिघला हुआ शीशा उस पर उड़ेल दिया हो।
दर्द के कारण टीटो रुक गया , और इसी बीच वेंकी ने बात संभाली—“ अगले ही दिन नीलाद्रि सर ने उसे ढूँढ लिया । बहुत बुरी हालत में थी । तुरंत hospital ले गए । घर पर खबर भेजी। नीलाद्रि सर , शांतनु सर और नीलिमा मैडम ने इलाज की पूरी ज़िम्मेदारी ली । वो हमें इंसाफ दिलाना चाहते थे …”
वेंकी ने कहा , “ लेकिन हमारे पापा… primary school के teacher हैं । सोच बहुत पुरानी है । वो जग-हँसाई नहीं चाहते थे। एक दिन उन्होंने नीलाद्रि सर और नीलिमा मैडम की बहुत बेइज़्ज़ती की… घर से निकाल दिया। उन्होंने भी फिर आना बंद कर दिया । ”
राधिका ने धीमी आवाज़ में पूछा , “ कहाँ है तुम्हारी बहन ? ”
टीटो ने बिना भाव बदले कहा , “ वह नहीं रही , मैडम। ”
उसकी आवाज़ में थकान थ—जैसे लंबा मातम कर चुका हो , “ उस रात के बाद से बहुत depressed रहती थी । जितना हो सका हमने इलाज करवाया । पर शायद वह काफी नहीं था । पिछले महीने… कीड़े मारने वाला ज़हर पी लिया । चार दिन hospital में रही …”
टीटो कहता हैं—”आख़िरी दिनों में बस आपका नाम लेती रही । कहती रही—यह अंगूठी किसी भी हालत में इनायत खान तक पहुँचा देना । इसलिए अंतिम क्रिया के बाद हम सीधे आपकी तलाश में निकल पड़े । ”
वेंकी झिझकते हुए बोला , “ भागते वक्त यह अंगूठी उसके पैर के नीचे आ गई थी… इसलिए ऐसी हो गई … ” शर्म उसके चेहरे पर साफ़ थी ।
टीटो बड़ी मुश्किल से खड़ा हुआ। हाथ जोड़कर बोला , “ इजाज़त दीजिए , मैडम । अगर कोई भूल हुई हो तो माफ़ कर दीजिए । माता रानी आपका भला करे । ”
दोनों लड़के चले गए।
राधिका की नज़र सोफ़िया और इमरान पर गई। कुछ पूछने से पहले ही दोनों वहाँ से खिसक गए।
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राधिका ने couch पर बैठकर अंगूठी उठाई। पतली, मामूली-सी सोने की अंगूठी , “ यही था ना… जिससे नील भैया ने तुझे propose किया था ? इतनी साधारण अंगूठी क्यों ? यह किसकी थी , हालु ? ”
इनायत अब भी शून्य में देख रही थी।
राधिका ने ज़ोर से दोहराया , “ हालु ! यह अंगूठी किसकी थी ? ”
सच यह था—27 July 2018 को नीलाद्रि ने उसे propose किया था। यह भी सच था कि अंगूठी उसकी उंगली में ठीक से फिट नहीं हो रही थी। और उससे भी बड़ा सच—इनायत को उस रात बहुत कुछ याद ही नहीं। उसका पूरा ध्यान उस शाम मौजूद मशहूर निर्देशक जयंत कर्मकार पर था । उसके साथ dream project sign होने की खुशी में वह इतनी मदहोश थी कि बाकी सब धुँधला पड़ गया था। जयंत के साथ काम करना बचपन का सपना था। जब वो सपना सच हुआ, ऐसे में नीलाद्रि का proposal… बस एक proposal बनकर रह गया। शादी की बात से खुद को distract नहीं करना चाहती थी। इसलिए सबके सामने हँसी-मज़ाक में बात टाल दी।
राधिका फिर बोली , “ जब नील भैया ने अंगूठी पहनाई थी , क्या कहा था ? यह अंगूठी किसकी थी ? ” वह बिखरे हुए तार जोड़ने की कोशिश कर रही थी , “ मतलब उस रात सच में एक बच्ची थी ? है ना , हालु ? ” राधिका माथा पकड़कर फर्श पर बैठ गई , “ काश तू हिम्मत करती ….हमारी लापरवाही से कितनी ज़िंदगियाँ बर्बाद हो गईं…”
इनायत अब भी बुत बनी बैठी थी। बंद आँखों से आँसू बह रहे थे । दिमाग में वह रात rewind होने लगी । क्या हुआ था ? किसने क्या कहा ? पिछले डेढ़ साल से डॉक्टर सेठी हर हफ्ते यही पूछती थीं—“ उस रात क्या हुआ था ? ” हर बार इनायत बच निकलती थी । लेकिन अब ? अब सच खुद चलकर सामने आ गया था। सारे सबूत , सारी गवाही… उसके सामने खड़े थे ।
राधिका की आवाज़ काँपी , पर शब्द सख़्त थे—“ इन् सब में सब से बड़ा पापी तू हैं , हालु । आज भी अगर तेरी आँख नहीं खुली , तो मैं सच में तुझसे नफ़रत करने लगूँगी । ”
शायद राधिका के शब्दों ने… या अपने टूटे हुए सब्र ने…आखिरकार इनायत ने आँखें खोल दीं । एक पल राधिका को देखा—और बिना कुछ कहे vanity से बाहर निकल गई।
उसकी चाल में ऐसा कुछ था कि राधिका सिहर उठी , “ कहाँ जा रही है त… ? रुक … हालु ”
इनायत नहीं रुकी । वह shooting floor की तरफ बढ़ रही थी—जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे खींच रही हो।
राधिका को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था । वह इनायत को रोकने के लिए इनायत के पीछे चल रही थी , ” रुख हालु ! Haalu please stop…!”
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Shooting Floor पर सब अपने-अपने काम में busy थे, बस एक इमरान को छोड़कर। अपनी आदत से मजबूर इमरान एक spot boy से उलझ गया था। लोगों से बिना वजह उलझ पड़ना उसकी आदत है। वह भूल जाता है कि वह खुद बोलता है और सुन नहीं सकता। इसीलिए लोगों को उसे समझने में बड़ी तकलीफ होती है। उसे लगता है कि उसकी मन की बात समझ लेना हर किसी की duty है। इनायत चंद पल रुककर इमरान की हरकत देख रही थी। इमरान बेहद चिढ़ जाता है जब spot boy उसकी मन की बात समझ नहीं पाता और गुस्से में वह spot boy के गाल पर एक ज़ोर का तमाचा जड़ देता है।
इनायत की नज़र पास ही में रखे एक iron bar पर जाती। वह धीरे से उसे उठाकर आगे बढ़ती है और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाए, इनायत आकर table पर रखे monitor पर ज़ोर से मारती है और फिर camera और फिर set का दूसरा सामान। इनायत की उस रूद्र रूप देख कर इमरान और floor पर मौजूद किसी के पास इतना हिम्मत नहीं होता जो आगे बढ़कर उसे रोके ।
चंद ही पल में उसने floor को तहस-नहस कर दिया। आखिर राधिका सामने आती हैं और अपनी पूरी जोर लगा के इनायत को रोकती हैं । इनायत पागलों की तरह चीखती रहती हैं , ” Pack up ! Pack up ! Pack up ! जानवर हो तुम सब ! तुम सब ने मिलकर मुझे भी जानवर बना दिया ! तुम लोगों की बातों में आकर मैंने अपनी घर तबाह कर ली । मैंने खुद को बर्बाद कर ली ! ”
इनायत फर्श पर परी काँपने लगी। अपनी सहेली को देखकर राधिका समझ चुकी थी , के इनायत इस सच की भार से पूरी तरह से टूट चुकी हैं । टूटी हुई इनायत को वापस समेटते हुए राधिका उसे कसकर अपने सीने से लगा लेती है। राधिका के पास इनायत को तसल्ली देने के लिए सारे शब्द कम पड़ रहे थे। बेहद डरि हुयी इनायत कांपती हुयी आवाज़ में राधिका से सवाल करती हैं , “ राधे , अब में नील का सामना कैसे करुँगी ? ”
सुनते रहिए Bodhon 2047 Channel की Original Audio Story “ज़िद से निभाते हैं”।
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