ज़िद से निभाते हैं – Ex Factor
Zid Se Nibhatey Hain Episode 2: शिकायत
शूटिंग फ्लोर पर पहुँचते ही इनायत की मुलाक़ात अपनी को-स्टार और पुराने दोस्त अपूर्वा से होती है । वोह हार बात पर मजाक उड़ाता हैं । वह मुस्कुराके गले लगाता है, “क्यों , खान मैडम… आज मार-पीट का मूड था?”
इनायत हँसकर पलटती है , “क्या करें… तुम मर्दों की फ़ितरत कब बदलती है?”
अपूर्बा झुककर फुसफुसाता है, “नील को बता दूँ , तू हम मर्दों के बारे में ऐसा सोच रखती हैं?”
इनायत तुरंत वार करती है, “तो मैं तेरी बीवी को बता दूँ, तू मेरा घर तोरणा चाहता हैं?”
अपूर्बा दोनों हाथ उठा देता है , “OK! OK! Ceasefire, Khan Madam!”
इनायत हँसी दबा लेती है। तभी तरुण अपनी टीम के साथ आ जाता है—और पल भर की मस्ती वहीं खत्म हो जाती है।
तरुण आज का सीन समझा रहा था। बारह कैमरों से शूट होना था। म्यूज़िक कॉन्सर्ट के बीच हीरो स्टेज पर होगा, और हीरोइन—इनायत—घोड़े पर सवार होकर भीड़ चीरती हुई आएगी । हीरो को देख कर बिना कुछ कहे वापस लौट जाएगी ।
सुनने में एक-दो मिनट का सीन था , लेकिन दो हज़ार लोगों की भीड़ और तेज़ दौड़ते घोड़े के साथ—यह आसान नहीं था ।
रेनो को इनायत के सामने लाया गया। तेज़ धूप थी। इनायत बार-बार उसका टेम्परेचर चेक कर रही थी। खुद से ज़्यादा उसे रेनो की फ़िक्र थी। राधिका आगे आई।
“इतना मत सोच, हालू। रेनो के लिए पूरी टीम है। बस वादा कर—अगर uncomfortable लगे तो फ़ौरन रुक जाएगी ” , रेनो ने बेचैनी से ज़मीन पर टाप मारी।
इनायत हँस पड़ी। “OK मम्मी। अपना ध्यान रखूँगी।”
Asrusur Series — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 2
दिन भर की शूटिंग के बाद पैक-अप हुआ । इनायत नंदी के साथ वैनिटी की ओर बढ़ रही थी कि सीढ़ियों पर उसका पैर फिसल गया। गिरने से पहले ही नंदी ने उसे थाम लिया।
राधिका दौड़कर आई। दोनों ने मिलकर उसे काउच पर बैठाया।
नंदी ने पूछा, “Bhabhi , आप ठीक हो ?”
इनायत मुस्कुराई, “हाँ भाइया… बस हल्की सी मोच।”
“आप थोड़ी देर आराम कर लीजिए, हम फिर निकलते हैं…”, नंदी चला गया ।
Bait Series — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 2
इनायत दर्द के साथ खुद को एडजस्ट कर रही थी। राधिका ने स्टाफ को आवाज़ दी, “टीना, फ़ौरन ice bag और sneakers लाओ !”
जूते उतारते वक़्त इनायत ने देखा—राधिका उसे बिना पलक झपकाए देख रही थी, “तेरा दिन कैसा रहा ?” राधिका का ध्यान भटकाने के लिए इनायत ने पूछा।
आमतौर पर इस सवाल पर राधिका भड़क जाती थी। आज नहीं, “पैर का दर्द कैसा है?” उसने शांत स्वर में पूछा।
इनायत ने आँखें बंद कीं । फिर हल्के तंज के साथ बोली, “पुराना आशिक़ है… वक्त-बेवक्त हाल पूछ लेता है। हर कोई तेरे जेठ जैसा बेदर्द नहीं होता।”
राधिका का सब्र टूट गया, “हर बात में उसे मत घसीट, हालू। गलती तेरी थी। रिश्ता तूने तोड़ा।”
इनायत ने बात घुमाई, “वाह ! दीदी के लिए bouquet ले आई ?”
“Topic change मत कर!”, राधिका लगभग चिल्लाई।
इनायत उठी और वॉशरूम की तरफ़ बढ़ गई, “तू जितना भागेगी, सच उतना पास आएगा”, राधिका ने पीछे से कहा ।
अंदर से इनायत की आवाज़ सुनाई दी, “ पंद्रह मिनट। एयरपोर्ट जाना है।”
काफ़िला तेज़ी से एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था। राधिका चुप थी। इनायत भी। इनायत जानती है , सच हमेशा चुभता है।
कुछ देर बाद राधिका बोली, “दीदी आ रही हैं। मूड ठीक कर लेते हैं।”
इनायत ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “पठान हूँ… फिर भी दिमाग़ ठंडा रहता है, और mood भी।”
राधिका हँसी, “खत्रिया का खून है—गलत देखूँ तो उबलता है।” बातें करते करते गाडी सिग्नल पर रुकी। तभी राधिका की नज़र बाहर गई—और वह चौंक उठी। एक चेहरा खिड़की के शीशे के पार। एक हाथ ज़ोर से शीशे पर पड़ा। सिग्नल हरा होते ही गाड़ी चल पड़ी। सब कुछ बस चंद पलों में हो गया।
राधिका पीछे मुड़कर देखती है—वही बाइक। अब और तेज़। राधिका ने नंदी को कॉल किया, “यह बाइक सुबह से हमें फ़ॉलो कर रही है। देख लो… please.”
इनायत ने इशारे से रोका, “इतनी फ़िक्र मत कर…” इनायत ने फिर से आँखें बंद कर लीं। वह पिछले सात दिनों में मुश्किल से सो पाई थी।
Chaatuspaad Series — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 2
एक महीने बाद शारदा नीदरलैंड से लौट रही थी। इंटरनेशनल कोर्ट में बड़ी जीत के साथ । बैरिस्टर शारदा माहेश्वरी—देश की बड़ी लॉ फ़र्म की चेयरपर्सन । और नीलाद्रि की बड़ी बहन।
इनायत की नज़र पड़ते ही वह अपने पैर का दर्द भूलकर बच्चे की तरह दौड़ी और शारदा से लिपट गई, “दीदी… तुम नहीं जानती , मैंने तुम्हें कितना मिस किया।”
शारदा मुस्कुराईं और इनायत को दिलासा देते हुए कहा, “अब साए की तरह साथ रहूँगी।”
राधिका गंभीर आवाज़ में बोली, “मतलब सीधा पेट पर लात !”
राधिका ने bouquet आगे बढ़ाया, “Congratulations , दीदी। घर में सब बहुत खुश हैं।”
इनायत ने जोड़ा, “पूरा देश खुश है, दीदी।”
शारदा ने इनायत को देखकर गंभीर स्वर में कहा, “पर मैं तुझसे खुश नहीं हूँ। बड़ी शिकायतें सुनी हैं मैंने तेरी…”
इनायत चौंकी, “मेरी शिकायत ?”
“सब बताऊँगी”, शारदा बोलीं, “पहले घर चलते हैं।”
सब गाड़ी में बैठे। इस बार काफ़िला घर की ओर मुड़ गया।
Bodhon-Petrol — Coming Soon
Keep Reading Zid Se Nibhatey Hain Episode 2
रात काफ़ी हो चुकी थी। हफ़्ते भर की थकान उतारने के लिए इनायत शारदा की गोद में लेटी थी। शारदा चुपचाप उसके बालों में उंगलियाँ फेर रही थी।
कुछ देर बाद इनायत ने धीमे से पूछा, “तुम बताओ दीदी… किसने शिकायत की है तुमसे?”
शारदा ने बाहर देखते हुए कहा, “आरती कह रही थी, तू उसे doctor की तरह नहीं, drug peddler की तरह treat करती है।”
इनायत झटके से बैठ गई, “अस्तग़फ़िरुल्लाह दीदी! कुछ तो अल्लाह का ख़ौफ़ करो! मैं हर हफ़्ते session attend करती हूँ। कितना भी काम हो, जाती हूँ …”
शारदा का स्वर सख़्त हो गया, “डॉक्टर के पास जाकर मुझ पर कोई एहसान नहीं करती तू। आरती कह रही थी—तेरा एक ही टारगेट होता है… sleeping pills की dose कैसे बढ़े। तू cooperate नहीं करती। खुद को बहुत smart समझती है?” शारदा फिर सीधे पूछा, “सच बता। दिन में कितनी sleeping pills लेती है ? आरती के अलावा और कितने doctors से prescription ले रही है?”
इनायत ने उनका हाथ पकड़ लिया, “कसम से दीदी… मैं सिर्फ डॉक्टर सेठी के पास जाती हूँ। वही prescription follow करती हूँ। मैं कोई नशा नहीं करती।” इनायत के आँखों में आँसू आ गए, “मैं झूठ नहीं बोल रही…”
शारदा चुप हो गईं। वह जानती हैं—जो लोग prescription drugs से नशा करते हैं, उन्हें यह समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
अचानक कार ज़ोर से ब्रेक मारकर रुकी । सब झटके से आगे की ओर हुए। इनायत सीट बेल्ट में नहीं थी—वह गिरती, उससे पहले शारदा ने थाम लिया, “तुम दोनों ठीक हो ?” शारदा की आवाज़ कांप रही थी।
ड्राइवर घबराया हुआ बोला, “लगता है कोई कार के नीचे आ गया है, मैडम ।”
ड्राइवर की बात सुनतेही इनायत सेहम उठती हैं । वह फिर से किसी और की बर्बादी की वजह नहीं बनना चाहती थी।
“दीदी, please अपना ख्याल रखना…” इनायत चिंता भरी नज़रों से कहती है।
“Don’t worry, मुझे कुछ नहीं होगा।”, शारदा उसे तसल्ली देती है।
“तुम दोनों कार में रहो, मैं देखती हूँ” , शारदा बोलीं।
राधिका ने रोका, “नहीं दीदी , नंदी भैया हैं। वो देख लेंगे।”
उसी समय नंदी का फ़ोन आया, “दीदी, वही दो लड़के हैं।”
“कौन दो लड़के ?” , राधिका ने पूछा ।
“जो पिछले कुछ दिनों से भाभी का पीछा कर रहे थे”, नंदी कहता है।
घबराहट हटते ही राधिका ने पूछा, “पक्का वही हैं ? ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ?”
शारदा ने दरवाज़ा खुलवाया। उतरने से पहले बोलीं, “तुम दोनों बाहर नहीं आओगे। अगर कुछ उल्टा लगे तो कार लेकर निकल जाना।”
“दीदी, अपना ख्याल रखना”, इनायत ने कहा। “Don’t worry”, शारदा ने आश्वस्त किया।
सुनते रहिए Bodhon 2047 Channel की Original Fiction Series “ज़िद से निभाते हैं”।
कहानी आगे कहाँ जाती है, पढ़ना चाहते हैं ? Please visit www.remoteowls.in
